मैं जात-पात तोड़क मंडल के सदस्यों के प्रति क्षमाप्रार्थी हूँ जिन्होंने मुझे इस सम्मलेन की अध्यक्षता के लिए आमंत्रित किया|मुझे यकीन है कि मुझे अध्यक्ष के रूप में चुनने के लिए उनसे कई सवाल किये गए होंगे | मंडल से पुछा गया होगा कि लाहोर में हो रहे सम्मलेन की अध्यक्षता के लिए मुंबई से एक आदमी को क्यों बुलाया गया? मेरा मानना है की मंडल को सम्मलेन की अध्यक्षता के लिए मुझसे बेहतर योग्य व्यक्ति आसानी से मिल सकता था |मैंने हिंदुओं की आलोचना की है| मैंने महात्मा गांधी के अधिकार पर सवाल उठाए हैं जिनकी यह बड़ी इज्जत करते हैं| वे मुझसे नफरत करते हैं| उनके लिए मैं उनके बगीचे का सांप हूं| मंडल में निसंदेह सियासी दिमाग वाले हिंदुओं ने यह पूछा होगा कि सम्मान के इस पद के लिए मुझे क्यों चुना गया? यह वाकई काफी साहस का काम है| मुझे इस से कोई हैरानी नहीं होगी, यदि कोई राजनीति परक हिंदू इसे अपमान कहे| मेरा चयन आम धर्म पर हिंदुओं को रास नहीं आएगा| मंडल से पूछा जाएगा कि उसने अध्यक्ष के चयन के लिए शास्त्रीय आज्ञापत्र अवहेलना क्यों की? शास्त्रों के अनुसार ब्राह्मण को तीन वर्गों का गुरु चुना गया है,